हाँ ख़ामोश हुँ मैं

हाँ ख़ामोश हुँ मैं,
पर अंदर एक अजीब सा शोर हैं।
दिल करता हैं सब लिख दूँ,
पर डर लगता हैं कोई पढ़ ना ले,
अपने मन मे ग़लत बाते गढ़ ना ले।
कब तक इस डर से डर कर रहूँगी मैं,
कब तक खुद से लड़कर रहूँगी मैं।

ना जाने क्यों फ़र्क पड़ता है मुझे,
इस बेबुनियाद दुनिया से,
क्यों सिखाया जाता है कि ‘ लोग क्या कहेंगे ‘,
आज भी अनजान हूँ मैं इस राज़ से।

खुद को संझौती हूँ रोज़ एक नई शुरुआत के लिए,
मैं भी जलाना चाहती हूँ फिर से दीये।
पर खामोश हूँ मैं,
ना जाने क्यों खुद को रोक लेती हूँ,
अपनी ही सोच में खो जाती हूँ,
और फिर अपने सपने शुरुआत से पिरोती हूँ।
ये शोर जिससे मैं ख़ामोश हूँ,
एक दिन टूट जाएगा सब,
और कह सकूँगी मैं कि ‘ हाँ खुश हूँ मैं अब’।

SANJANA GURJAR

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कुछ तो बात थी

तेरा मुझसे यु मिलने मे कुछ तो बात थी,
आखिर सीखा ही दिया तूने, मोहोब्बत कैसे करते हैं।
यू तो बहुत हैं दुनिया में जो,
बदनाम करते हैं ये कहकर की,
कि बर्बाद करदिया इश्क़ ने।
पर तेरी को फिरसे जीने की चाह मे कुछ तो बात थी,
तेरा सुबह उठ के मेरी ही आवाज़ सुनने में कुछ तो बात थी,
मुझे अपना कहकर हक़ जताने में कुछ तो बात थी,
पर बीत गया वो वक़्त भी,
जब मैं, सिर्फ मैं, तेरे लिए खास थी,
उस प्यार में कुछ तो बात थी।

SANJANA GURJAR

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।

Yatra naryastu pujyante ramante tatra Devata,
yatraitaastu na pujyante sarvaastatrafalaah kriyaah

Where Women are honoured, divinity blossoms there, and where ever women are dishonoured, all action no matter how noble it may be, remains unfruitful.

दहेज़

एक कविता मेरी उन बहनों के लिए,
जिनको दहेज़ के कारण मार दिया जाता हैं,
नाम कस्तूरी।

टूटे सारे सपने मेरे, छुटे सारे अपने मेरे,
कैसी मजबूरी, सब से है अब ये दूरी,
लो चली मैं, हाँ चली मैं,
लो चली इस जहाँ से कस्तूरी।

मत रोना माँ, ना रोना मेरे बाऊ जी,
जितना कमाया धन, जितना कमाया सब,
उनको दे आओ जी, हाँ सब उनको दे आओ जी।

देकर दहेज़ सारा, इच्छा करदो पूरी,
मैं तो रह गई अधूरी,
लो चली मैं, हाँ चली मैं,
लो चली इस जहाँ से कस्तूरी।

सपने देखे बहुत मैंने, साथ दिया माँ ने,
पर अगले घर जाकर पता चला,
तेरा भाग्य उनके हवाले, भगवान ये कैसी रीति,
लो चली मैं, हाँ चली मैं,
लो चली इस जहाँ से कस्तूरी।

अगला जन्म मत ही दियो,
माँ मेरी फिर रोयेगी,
कैसे कैसे पालेगी और,
कैसे उठाएगी फिर मेरी मजबुरी,
लो चली मैं, हाँ चली मैं,
लो चली इस जहाँ से कस्तूरी।

संजना गुर्जर

Men Don’t Tell is a 1993 American made-for-television drama film

Starring Peter Strauss and Judith Light. It was directed by Harry Winer. The film first aired on CBS network on March 14, 1993.

The film was based on the true story of a loving husband who is terrorized by the violent behavior of his wife.

The original broadcast of Men Don’t Tell was seen in 18.3 million homes, ranking third among the week’s prime time broadcast, behind ABC’s Home Improvement and CBS’s 60 Minutes. After the original airing, the film was never rebroadcast on over-the-air television, reportedly because it incurred the wrath of several women’s groups. However, the film was later shown a number of times on cable’s Lifetime network.In 1994, Peter Strauss was nominated for a Golden Globe award for “Best Performance by an Actor in a Mini-Series or Motion Picture Made for TV”.

CBS was very high on the movie. They saw it as very high concept because it was one movie that hadn’t been done before. They turned out to be right, as it did very well. It did very well overseas as well. It was one of the highest-rated movies of the year. Out of some 300 two-hour movies, I think it was rated number four, so it did extremely well. A lot of the reaction was that people turned it on with the idea of just to watch a few minutes but ended up being compelled to watch the whole movie and feeling very differently by the time it was finished.”

A married man suffers horrific physical and verbal abuse at the hands of his wife as their marriage falls apart – only to find himself too afraid and embarrassed to report her to the authorities. Drama, starring Peter Strauss, Judith Light, Ashley Johnson and Michael Rand.

This movie shows another side to spousal abuse that not too many people thought is possible–the husband being abused and the wife the abuser.Unique among the many made-for-TV dramas about spousal abuse–most of which are about women victimized by men–Men Don’t Tell dramatizes the true story of a loving husband who is terrorized by the violent behavior of his wife.

🤞🤞

नहीं बस्ती किसी ओर की सूरत अब इन आँखों मे,

काश की तुम्हे इतने गौर से नहीं देखा होता।

संजना गुर्जर

I DON’T WANT TO GROUP UP

If growing up means,
Witnessing your confusion,
I don’t want to grow up.

Take me back in the time,
Where you often lie about society.

I can see your wrinkles,
And your skin getting dry,
I can’t see you shattered माँ,
And i don’t wanna grow up.

SANJANA GURJAR

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